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Bihar Health News: बिहार के सभी जिला अस्पतालों में 7 दिन में ICU और 24x7 इमरजेंसी सेवा शुरू, रेफरल व्यवस्था पर सख्ती

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आलम की खबर: बिहार सरकार ने सभी जिला अस्पतालों में सात दिन के भीतर ICU और 24×7 इमरजेंसी सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है। मरीजों के रेफरल, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और भाव्या पोर्टल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई है।

पटना, 12 जुलाई। आलम की खबर:बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों को निर्देश दिया है कि सात दिनों के भीतर आईसीयू (ICU) और 24 घंटे इमरजेंसी सेवाओं का संचालन पूरी क्षमता के साथ सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही मरीजों को बिना ठोस चिकित्सीय कारण के बड़े अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में रेफर करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का उद्देश्य यह है कि जिला अस्पतालों में उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक उपकरणों और चिकित्सा सुविधाओं का पूरा उपयोग हो तथा अधिक से अधिक मरीजों का इलाज उनके अपने जिले में ही संभव हो सके।

नई गाइडलाइन के अनुसार अब किसी भी मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थान भेजने से पहले संबंधित चिकित्सक को यह प्रमाणित करना होगा कि आवश्यक सुविधा संबंधित जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। यदि रेफरल किया जाता है तो उसका स्पष्ट कारण रिकॉर्ड में दर्ज करना अनिवार्य होगा। मरीज के उपचार, जांच, दवा, चिकित्सकीय सलाह और रेफरल से जुड़ी पूरी जानकारी भाव्या पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसकी प्रति मरीज अथवा उसके परिजनों को भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर मरीजों को रेफर करने से पहले उनकी स्थिति को स्थिर करना आवश्यक होगा। इसके बाद उन्हें सरकारी एंबुलेंस के माध्यम से सुरक्षित रूप से संबंधित अस्पताल भेजा जाएगा। सभी चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों का भाव्या पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। अस्पतालों को डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का अद्यतन विवरण भी पोर्टल पर अपलोड करना होगा।

नई व्यवस्था के तहत ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी और दुर्घटना में आने वाले सभी मरीजों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। भर्ती मरीजों की ABHA ID बनाकर उनका इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में इलाज के दौरान उनकी मेडिकल हिस्ट्री आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

सरकार ने रेफरल व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति गठित करने का निर्णय लिया है। वहीं राज्य स्तर पर एक नोडल पदाधिकारी सभी जिलों की व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। सरकार का मानना है कि इस पहल से जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ेगी, मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का दबाव कम होगा और लोगों को अपने जिले में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल रेफरल कम करना नहीं, बल्कि जिला अस्पतालों को सक्षम बनाकर आम लोगों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। यदि निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ तो स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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